सीने में जलन,आंखों में तूफान सा क्यों है
इस शहर में हर शख़्स परेशान-सा क्यूँ है
दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढे
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान-सा क्यूँ है
-अखलाक़ मौहम्मद ख़ान ‘शहरयार’
इस शहर में हर शख़्स परेशान-सा क्यूँ है
दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढे
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान-सा क्यूँ है
-अखलाक़ मौहम्मद ख़ान ‘शहरयार’
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