Friday, January 31, 2014
Himanshu Pandya गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
झीनी-झीनी बीनीं, चदरिया लहरेले तोहरे कान्हे
जब हम तन के परदा माँगी आवे सिपहिया बान्हे
सिपहिया से अब नाही बन्हइबो, चदरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
कंकड चुनि-चुनि महल बनवलीं हम भइलीं परदेसी
तोहरे कनुनिया मारल गइलीं कहवों भइल न पेसी
कनुनिया अइसन हम नाहीं मनबो, महलिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
दिनवा खदनिया से सोना निकललीं रतिया लगवलीं अँगूठा
सगरो जिनगिया करजे में डूबलि कइल हिसबवा झूठा
जिनगिया अब हम नाहीं डुबइबो, अछरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
हमरे जंगरवा के धरती फुलाले फुलवा में खुसबू भरेले
हमके बनुकिया के कइल बेदखली तोहरे मलिकई चलेले
धरतिया अब हम नाहीं गंवइबो, बनुकिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
झीनी-झीनी बीनीं, चदरिया लहरेले तोहरे कान्हे
जब हम तन के परदा माँगी आवे सिपहिया बान्हे
सिपहिया से अब नाही बन्हइबो, चदरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
कंकड चुनि-चुनि महल बनवलीं हम भइलीं परदेसी
तोहरे कनुनिया मारल गइलीं कहवों भइल न पेसी
कनुनिया अइसन हम नाहीं मनबो, महलिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
दिनवा खदनिया से सोना निकललीं रतिया लगवलीं अँगूठा
सगरो जिनगिया करजे में डूबलि कइल हिसबवा झूठा
जिनगिया अब हम नाहीं डुबइबो, अछरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
हमरे जंगरवा के धरती फुलाले फुलवा में खुसबू भरेले
हमके बनुकिया के कइल बेदखली तोहरे मलिकई चलेले
धरतिया अब हम नाहीं गंवइबो, बनुकिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले
Thursday, January 30, 2014
waah-waah
मैं झूम के गाता हूँ कमज़र्फ ज़माने में,
एक आग लगा ली है एक आग बुझाने में !
ये सोच के दरियां में मैं कूद गया यारों,
मुझको वो बचा लेगा माहिर है बचाने में !
आये हो जो आँखों में कुछ देर ठहर जाओ,
एक उम्र गुजरती है एक ख्वाब सजाने में !
जो खूब सहेजा था वो पास नहीं लेकिन,
जो खूब लुटाया था अब भी है खजाने में !
उठने दे जो उठता है इस दिल से धुँआ कोई,
क्या होगा तुझे हासिल कोहराम मचाने में !
एक आग लगा ली है एक आग बुझाने में !
ये सोच के दरियां में मैं कूद गया यारों,
मुझको वो बचा लेगा माहिर है बचाने में !
आये हो जो आँखों में कुछ देर ठहर जाओ,
एक उम्र गुजरती है एक ख्वाब सजाने में !
जो खूब सहेजा था वो पास नहीं लेकिन,
जो खूब लुटाया था अब भी है खजाने में !
उठने दे जो उठता है इस दिल से धुँआ कोई,
क्या होगा तुझे हासिल कोहराम मचाने में !
Sunday, January 12, 2014
Friday, January 10, 2014
Sufi Music: Ye Kaun Aata Hai Tanhaiyon Mein Jaam Liye - Makhdo...
Sufi Music: Ye Kaun Aata Hai Tanhaiyon Mein Jaam Liye - Makhdo...: Ye Kaun Aata Hai Tanhaiyon Mein Jaam Liye Dilon Mein Chaandni Raaton Ka Ehtemaam Liye Hujoom-e-Bada-o-Gul Mein, Hujoom-e-Yaaran Mein...
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