Thursday, May 1, 2014
Wednesday, April 16, 2014
Saturday, April 12, 2014
Thursday, March 20, 2014
Tuesday, March 4, 2014
Friday, January 31, 2014
Himanshu Pandya गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
झीनी-झीनी बीनीं, चदरिया लहरेले तोहरे कान्हे
जब हम तन के परदा माँगी आवे सिपहिया बान्हे
सिपहिया से अब नाही बन्हइबो, चदरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
कंकड चुनि-चुनि महल बनवलीं हम भइलीं परदेसी
तोहरे कनुनिया मारल गइलीं कहवों भइल न पेसी
कनुनिया अइसन हम नाहीं मनबो, महलिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
दिनवा खदनिया से सोना निकललीं रतिया लगवलीं अँगूठा
सगरो जिनगिया करजे में डूबलि कइल हिसबवा झूठा
जिनगिया अब हम नाहीं डुबइबो, अछरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
हमरे जंगरवा के धरती फुलाले फुलवा में खुसबू भरेले
हमके बनुकिया के कइल बेदखली तोहरे मलिकई चलेले
धरतिया अब हम नाहीं गंवइबो, बनुकिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
झीनी-झीनी बीनीं, चदरिया लहरेले तोहरे कान्हे
जब हम तन के परदा माँगी आवे सिपहिया बान्हे
सिपहिया से अब नाही बन्हइबो, चदरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
कंकड चुनि-चुनि महल बनवलीं हम भइलीं परदेसी
तोहरे कनुनिया मारल गइलीं कहवों भइल न पेसी
कनुनिया अइसन हम नाहीं मनबो, महलिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
दिनवा खदनिया से सोना निकललीं रतिया लगवलीं अँगूठा
सगरो जिनगिया करजे में डूबलि कइल हिसबवा झूठा
जिनगिया अब हम नाहीं डुबइबो, अछरिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले ।
हमरे जंगरवा के धरती फुलाले फुलवा में खुसबू भरेले
हमके बनुकिया के कइल बेदखली तोहरे मलिकई चलेले
धरतिया अब हम नाहीं गंवइबो, बनुकिया हमरा के भावेले ।
गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले
Thursday, January 30, 2014
waah-waah
मैं झूम के गाता हूँ कमज़र्फ ज़माने में,
एक आग लगा ली है एक आग बुझाने में !
ये सोच के दरियां में मैं कूद गया यारों,
मुझको वो बचा लेगा माहिर है बचाने में !
आये हो जो आँखों में कुछ देर ठहर जाओ,
एक उम्र गुजरती है एक ख्वाब सजाने में !
जो खूब सहेजा था वो पास नहीं लेकिन,
जो खूब लुटाया था अब भी है खजाने में !
उठने दे जो उठता है इस दिल से धुँआ कोई,
क्या होगा तुझे हासिल कोहराम मचाने में !
एक आग लगा ली है एक आग बुझाने में !
ये सोच के दरियां में मैं कूद गया यारों,
मुझको वो बचा लेगा माहिर है बचाने में !
आये हो जो आँखों में कुछ देर ठहर जाओ,
एक उम्र गुजरती है एक ख्वाब सजाने में !
जो खूब सहेजा था वो पास नहीं लेकिन,
जो खूब लुटाया था अब भी है खजाने में !
उठने दे जो उठता है इस दिल से धुँआ कोई,
क्या होगा तुझे हासिल कोहराम मचाने में !
Sunday, January 12, 2014
Friday, January 10, 2014
Sufi Music: Ye Kaun Aata Hai Tanhaiyon Mein Jaam Liye - Makhdo...
Sufi Music: Ye Kaun Aata Hai Tanhaiyon Mein Jaam Liye - Makhdo...: Ye Kaun Aata Hai Tanhaiyon Mein Jaam Liye Dilon Mein Chaandni Raaton Ka Ehtemaam Liye Hujoom-e-Bada-o-Gul Mein, Hujoom-e-Yaaran Mein...
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