ba-shukriya - Mayank Saxena-
निदा फ़ाज़ली की एक पुरानी नज़्म जो उन्होंने अपने वालिद के लिए कही थी...
तुम्हारी क़ब्र पर मैं फ़ातिहा पढ़ने नहीं आया
मुझे मालूम है
तुम जा नहीं सकते...
तुम्हारी मौत की सच्ची ख़बर
जिस ने उड़ाई थी
वो झूठा है
तुम्हारी कब्र पर जिस ने
तुम्हारा नाम लिखा है
वो झूठा है
तुम्हारी क़ब्र में मैं दफ़्न हूं
तुम मुझ में ज़िंदा हो..
निदा फ़ाज़ली की एक पुरानी नज़्म जो उन्होंने अपने वालिद के लिए कही थी...
तुम्हारी क़ब्र पर मैं फ़ातिहा पढ़ने नहीं आया
मुझे मालूम है
तुम जा नहीं सकते...
तुम्हारी मौत की सच्ची ख़बर
जिस ने उड़ाई थी
वो झूठा है
तुम्हारी कब्र पर जिस ने
तुम्हारा नाम लिखा है
वो झूठा है
तुम्हारी क़ब्र में मैं दफ़्न हूं
तुम मुझ में ज़िंदा हो..
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