Tuesday, August 20, 2013

Gaur karo....
Shailja Pathak
बहनें हमेशा हार जाती है
की खुश हो जाओ तुम
जबकि उन्हें पता है जीत सकती हैं वो भी

अजीब होती है... बड़ी हो जाती है तुमसे पहले
अपने फ्रॉक से पोछ देती है तुम्हारे पानी का गिलास
तुम पढ़ रहे हो ..भींग जाता है तुम्हारा हाथ
पन्ने चिपक जाते हैं

तुम कितनी भी रात घर वापस आओ
ये जागती मिलती हैं
दबे पाँव रखती है तुम्हारा खाना
तुम्हारे बिस्तर पर डाल देती हैं आज का धुला चादर
इशारे से बताती हैं ..अम्मा पूछ रही थी तुम्हें
काहे जल्दी नही आ जाते ..परेशान रहते हैं सब

बहनें तुम्हारी जासूस होती हैं ..बड़ी प्यारी एजेंट भी
माँ भी ..की इनकी गोद में सर धरे सुस्ता लो पल भर

बहनें तुम्हारे आँगन की तुलसी होती हैं
तुम्हारे क्यारी का मोंगरा
बड़े गेट के पास वाली रातरानी
आँगन के उपेक्षित मुंडेर की चिड़िया होती है भैया
पुराने दाने चुगते हुए तुम्हारे नए घरों का आशीष देती हैं

हमारी आँखों के कोर पर ठहरे रहते हो तुम
हम जतन से रखती हैं तुम्हें

बहनें ऐसी ही होती हैं ...

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